ओशोधारा का ध्यान समाधि कार्यक्रम केवल एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह एक तरह का ज्ञानयज्ञ है। सभी संत ऋषि मुनि कहते हैं कि अज्ञानता ही सारे दुखों की जड़ है। व्यक्ति को यदि आत्मबोध हो जाए, स्वयं के होने का ज्ञान हो जाए तो उसके सारे दुख क्षण भर में तिरोहित हो जाते हैं। क्योंकि वस्तुतः हमारी आत्मसत्ता अविनाशी है, शाश्वत है, चैतन्य है। लेकिन इसको न जानने के कारण अज्ञानतावश हम शरीर को, मन को इतना पकड़ लेते हैं और उन्हीं की सेवा में रात और दिन रत रहते हैं ।इसलिए धीरे-धीरे जिंदगी को एक निरंतर तनाव की स्थिति में जीने के लिए बाध्य हो जाते हैं। लेकिन स्वयं की आत्यंतिक सत्ता को जानना जरा भी कठिन नहीं है। बस केवल एक शर्त है कि जीवन में एक समर्थ सद्गुरु का सहारा मिल जाए।
आगामी 2 से 10 मार्च के बीच में यह अद्भुत ज्ञानयज्ञ ऑनलाइन संपन्न होने जा रहा है जिसमें ना कहीं आना है ना कहीं जाना है अपने घर में मोबाइल के ही सामने बैठकर zoom app के माध्यम से आत्मसत्ता से परिचित होने का द्वार खुल रहा है।
आप सादर आमंत्रित हैं।
